भीलवाड़ा कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के कोहराम से मचे हाहाकार के बीच पॉजिटिव रोगियों की बढ़ती संख्या और अस्पतालों में जगह नहीं मिलने,ऑक्सीजन की कमी और दवाइयों के अभाव को लेकर जिला कलेक्टर द्वारा इन पर नियंत्रण रखने और मॉनिटरिंग के लिए बनाई गई टास्क फोर्स टीम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं ।टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में कुछ निजी अस्पतालों में अनियमिताए पाई गई तो वही कुछ जगह संक्रमित रोगी के लिए संजीवनी माने जाने वाले रेमेडीसिविर इंजेक्शन रोगी के परिजनों को हाथ में दिए गए कि वह इस जिम्मेदारी से अपनी निगरानी मे रोगी को लगाएं।

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सूत्रों के अनुसार जिला कलेक्टर शिव प्रकाश एम नकाते द्वारा संक्रमित रोगियों को उचित उपचार और दवाइयां मिले तथा निजी अस्पताल मनमानी ना करें और ऑक्सीजन की आपूर्ति बराबर हो इन सब के लिए एक टास्क फोर्स टीम गठित की जो मॉनिटरिंग का काम कर रही है। टीम के सदस्य ने निजी अस्पतालों का रोजाना निरीक्षण कर यह पता कर रहे हैं कि अस्पताल में संक्रमित गंभीर रोगी को सही उपचार और भर्ती की सुविधा है कहीं जो भर्ती हैं अनावश्यक रूप से तो भर्ती रह कर गंभीर रोगियों के लिए परेशानी तो नहीं खड़े कर रहे हैं ।इस टीम निरीक्षण में पहले ही दिन बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल और रामसनेही हॉस्पिटल में करीब 20 से अधिक रोगी ऐसे थे जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से ऊपर था और वह होम आइसोलेट रहकर भी अपना उपचार कर सकते थे लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उनको भर्ती कर रखा था इस पर टीम ने तत्काल सभी ऐसे रोगियों को डिस्चार्ज कराया और जिन संक्रमित रोगियों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे था और जिनको वास्तव में भर्ती होने की जरूरत थी ।ऐसे रोगियों को भर्ती कराया और उनका उपचार शुरू करवाया तथा कुछ अस्पतालों में तो रेमेडिसिवियर इंजेक्शन का सही उपयोग हो इस को ध्यान में रखते हुए संक्रमित रोगी के परिजनों को हाथ में दिए कि वह अपनी निगरानी में रोगी को इंजेक्शन लगवाएं यही नहीं टीम ने हर जगह ऑक्सीजन की चेकिंग की और टीम द्वारा ऑक्सीजन की की गई ऑडिट के बाद करीब 200 ऑक्सीजन सिलेंडरों की बचत हुई है ।सूत्रों के अनुसार टास्क फोर्स टीम निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर रही है और 2से 4 ऐसे रोगी जिनको भर्ती की जरूरत नहीं है और अस्पतालों में भर्ती है उनको डिस्चार्ज करा कर जरूरत संक्रमित रोगियों को भर्ती कराया जा रहा है।