भीलवाड़ा में कोरोनावायरस में कोहराम मचा दिया है और कोरोना पॉजिटिव रोगियों को को सरकारी और निजी अस्पतालों में सही समय पर समुचित उपचार नहीं मिलने से पीड़ित आमजन इधर से उधर भटक रहा है ।

इसका एक ज्वलंत उदाहरण शहर के इंदिरा कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार ने अपना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जिसमें उक्त आरोप लगाते हुए सरकार और प्रशासन से इलाज करने में नाकाम रहने पर इच्छा मृत्यु की मांग की है और इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया तथा फिर उपखंड अधिकारी शहर ओम प्रभा मय टीम के पहुंची और पीड़ित परिवार को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया ।

शहर के आटूण स्थित इंदिरा विहार कॉलोनी में रहने वाले सांवरलाल दवे ने आज सोशल मीडिया पर एक वीडियो बनाकर वायरल किया जिसमें सांवरलाल ने आरोप लगाया कि उसके घर में वह तथा किशनलाल दवे और सती देवी देवता उसकी बहन बीमार होने पर वह उपचार के लिए शहर के राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल में 4 बार गए लेकिन वहां उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद वह शहर के कुछ निजी अस्पतालों में भी गए वहां भी उनको भर्ती नहीं किया गया और उपचार के अभाव में उनकी बहन की मौत हो गई । सरकार और प्रशासन कोई सुनने वाला नहीं है अगर सरकार प्रशासन हमारा इलाज नहीं करा सकते तो हमें गोली मार दे या हमें इच्छा मृत्यु की इजाजत दें।

वायरल हुआ ये वीडियो दवाई इजाज न होने के कारण पीड़ित

इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया और जिला कलेक्टर शिव प्रकाश एम नकाते के निर्देश पर उपखंड अधिकारी शहर ओम प्रभा ने इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए इंदिरा विहार में रेवेन्यू टीम को भेजा और सच्चाई सामने आने के बाद एसडीएम ओम प्रभा अपने रेवेन्यू इंस्पेक्टर ललित लोढा, रीडर निजामुद्दीन नीलगर मय टीम के मौके पर पहुंची और वहीं पर चिकित्सक विभाग की आरआरटी टीम को बुलाया तथा सांवरलाल दवे किशन लाल दवे और सती देवी देवी ऑक्सीजन लेवल चेक करने और अन्य टेस्ट के बाद उनकी स्थिति खराब होने पर उनको एंबुलेंस से अंबेश हॉस्पिटल पहुंचा कर भर्ती कराया और इलाज के दिशा निर्देश जारी दिए।

इस कोरोना महामारी के दौरान वर्तमान में जिले के हालात बहुत खराब है मीडिया कर्मी जब भी प्रशासनिक अधिकारियों से कोरोना के संबंध में जानकारी मांगता है। वह चाहे ऑक्सीजन के संबंध में रेमडेसिविर इंजेक्शन के संदर्भ में और कोरोना से नेगेटिव होकर घर लौटे रोगियों के बारे में भी तक जानकारी मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराई जाती या फोन नहीं उठाए जाते हैं।