बुजुर्ग महिलाओं का क्या कसूर था, आवास के इंतजार में पथराई आंखे

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। इसी बूढ़ी महिला ने किसी का क्या बिगाड़ा था। जो इसको पीएम आवास योजना से वंचित रहना पड़ा। यह बूढ़ी महिला आज भी कच्ची टापरी बनाकर अकेली रहती है। इसके पास सर छुपाने को भी जगह नहीं है। चाहे बारिश हो या सर्दी तथा गर्मी का मौसम हो इसको इसी टापरी में रहना है। इसके दो बच्चे है जो अलग रहते और मेहनत मजदूरी कर पेट भरते है। यह अकेली ही रहती है। इसके पास कुछ नहीं है।

बजुर्ग गुलाब बाई पत्नी नंदो सहरिया के पास राशनकार्ड व आधार कार्ड तो है। जिससे इसको पेट भरने के लिए राशन सामग्री तो मिलती है। मगर इसके पास रहने को मकान नहीं है। आखिरकार इसको अभी तक आवास नहीं मिला है। यह सोचनीय प्रश्न है। सिस्टम की कमी है या फिर इस बुजुर्ग महिला की। पीएम आवास योजना की गाइड लाइन के अनुसार भी इस बुजर्ग का हक बनता है। उसके बाद भी इसको लाभ नहीं मिला है। आखिर यह कैसा सिस्टम है।

इसी तरह कर्णपुरा निवासी विधवा मांगी पत्नी कांशीराम सहरिया (60) एक पैर से दिव्यांग है। इस उम्र के आखिरी पड़ाव में भी अभी तक आवासहीन है और टापरी में निवास करती है। इस महिला के पास भी राशनकार्ड व आधार कार्ड उपलब्ध है। महिला ने बताया कि मेरा गुजारा राशन सामग्री से चला लेती हूं। यह महिला भी टापरी में बचा हुआ जीवन यापन कर रही है। पीएम आवास योजना के बड़े बड़े दावे किए जा रहे है। मगर सच्चाई कुछ और ही है। पीएम आवास योजना के नाम पर इन गरीबो का हक छिना जा रहा है। जबकि कई लोग ऐसे है जिनको दो दो बार आवास मिल चुके है।