बांडी नदी पर अतिक्रमण, कालख बांध सुखा पड़ने से सैकड़ो गांव प्यासे

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। जयपुर-फलौंदी मेगा हाईवे पर स्थित कालख बांध आज अपनी बदहाली पर आसू बहा रहा है। किसी जमाने में हिचकोले खाने वाला बांध आज पूर्ण तरीके से सूखा पड़ा है। कालख बांध में पानी आने का उद्गम स्थल सामोद की पहाड़ियाँ है। सामोद की पहाड़ियों से यह पानी बांडी नदी के माध्यम से जलोई बांध होता हुआ कालख बांध पहुँचता था।

लेकिन बांडी नदी पर अतिक्रमण हो जाने से बांध में पानी आने का रास्ता बंद हो गया है। जिसके चलते आज बांध में पानी की आवक नहीं हो रही है। बांध का निर्माण कालख ठीकाने के जागीरदार ठाकुर बेरीसाल सिंह के द्वारा लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल सके और सिंचाई की व्यवस्था को पूरा करने के उद्देश्य से सन् 1883 में बनास बेसिन की बांडी नदी पर निर्माण करवाया था।

बांध की भराव क्षमता 25 फीट चादर सहित 28 है और कैचमेंट एरिया 586.20 वर्ग किलोमीटर है। बांध से 1734 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई की जाती थी। बांध का पानी नहर के माध्यम से दूदू फागी तहसीलों से होता हुआ रेनवाल मांजी तक जाता था। 1981 में कालख बांध लबालब भर गया था और चादर चली थी। वर्तमान में कालख बांध का जल स्तर 0.00 है। 18 जुलाई 2014 को बांध में 2 फीट 3 इंच पानी आया था। 16 जुलाई 2016 को बांध में 2 फीट 7 इंच पानी आया था और उसके बाद 27 जुलाई 2018 को कालख बांध में 2 फीट 7 इंच पानी आया था। जबकि सन् 2011 में अच्छी बारिश होने पर कालख बांध में 5 फीट तक पानी की आवक हुई थी।

कालख बांध मे पानी नही होने के कारण झोटवाड़ा, जोबनेर, कालवाड़, आसलपुर, बोराज, भंदे का बालाजी, झरना, बगरू आमेर, फुलेरा, दूदू रेनवाल, फागी आदि क्षेत्रों में जलस्तर प्रतिवर्ष 10 मीटर गहरा होता जा रहा है। बांध के सूखने का प्रमुख कारण बांडी नदी पर अतिक्रमण और बारिश की कमी है। बांध में पानी नहीं होने के कारण आसपास के सैकड़ों गांवों में खेती बंद होने के कगार पर है। जिससे लोगों के सामने पीने का पानी और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कालख बांध के पानी से सैकड़ो गांवों मे सिंचाई होती थी। जिसका सीधा-सीधा लाभ सैकड़ों गाँवों को मिलता था। आसलपुर, उगरियावास, सहित कई गाँवों में तो पीने तक का पानी नही है। भूमिगत जल-स्तर निरन्तर गिरता जा रहा है। बोरवेल खुदाई में पानी की जगह धूल के गुबार उड़ रहे हैं। लोगों को खेती करना तो दूर अब तो पीने के पानी की भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने 800 फीट गहरे बोलवेल खुदवा लिए। लेकिन उनमें पानी नहीं हो रहा है। आस-पास के क्षेत्र में एक दशक पहले तक जिन किसानों के बोरवेल व कुओं में पानी की मात्रा अच्छी थी, उनके खेतों मे जमकर पैंदावार होती थी। अब अधिकांश किसानों के बोरवेल व कुंए सूख चुके हैं और बिजली कनेक्शन भी कटवा चुके हैं। आज ऐसी स्थिति हो गई है खुद किसान चारा, गेहूँ मोल खरीद कर ला रहे हैं, जो कभी बेचा करते थे।
कालख बांध में कैसे आ सकता पानी
(1) प्रदेश मे 37247 करोड़ की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईस्टन राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) के नाम से डीपीआर बनी पड़ी है। इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जाता है तो कालख और रामगढ़ बांध सहित कई बांध पुनजीर्वित होगे।
(2) बांडी नदी को यमुना नदी से जोड़ने पर।