चाकसू। आजाद रहना हर किसी को अच्छा लगता है। जहां तक इंसानों की बात करे तो वह आजाद रहते हैं, तो फिर पशु-पक्षियों की आजादी छीनने का हक इंसानों को किसने दिया। जयपुर की चाकसू नगर पालिका में नगर प्रशासन की ऐसी क्रूरता सामने आई है जिसे देखकर आप का भी दिल पसीज जाएगा। बता दें की नगर पालिका ने बंदर पकड़ने का ठेका दिया था जिसके बाद बंदरो को पकड़ने के बाद पिंजरों में बंद कर जलती गर्मी में नगर पालिका कार्यालय पीछे भवन में छोड़ दिया। जिससे कई बंदरो की मौत हो गई
बता दें पिछले कई दिनों से ये बन्दर इन्ही पिंजरों में कैद थे और आज़ादी के लिए छटपटा रहे थे। पिंजरे में बंद यह बंदर अपनी रिहाई के लिए किसी से प्रार्थना कर रहे थे। वही कड़ी धूप के चलते कई बंदरों की मौत भी हो चुकी है। नगर पालिका ने 42 डिग्री तापमान में इन्हें छोटे छोटे पिंजरों में ठूस ठूस कर भर रखा था। बंदरो पर ये क्रूरता इसलिए कि जा रही है क्योंकि वह बेजुबान हैं बोल नही सकते हैं।
इन बंदरो को पकड़ने के बाद दूर जंगल मे छोड़ना होता है लेकिन यहां पर नगर पालिका ने इन बंदरो के साथ क्रूरता करते हुए उन्हें कैद कर पिंजरों में डाल दिया था। ये पूरा मामला जब मीडिया के सामने पहुंचा तो अधिकारी सफाई देते नजर आए। पालिका के अधिशासी अधिकारी जजितेंद्र कुमार ने मामले में गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि मुझे मामले का पता नही है। जानकारी करके बताता हूं, वही पालिका चेयरमैन ने तो फोन तक रिसीव नहीं किया।
वही मीडिया में मामला सामने आने के बाद इन बेजुबानों को छोड़ने की बात सामने आई है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि नगरपालिका अधिकारियों को इन बेजुबान जानवरो पर अत्याचार करने का अधिकार किसने दिया और जब ये मामला अधिकारियों के संज्ञान में है तो क्या पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दोषियों पर कार्रवाई हो पाएगी।
नगर पालिका पार्षद व भाजपा चेयरमैन प्रत्याशी विनोद राजोरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर पालिका अधिशासी अधिकारी द्वारा बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया गया था जिसके तहत छोटे-छोटे पिंजरो में जिनकी साइज 2 बाय 2 की थी जिसमें 1 पिंजरे में 9 बंदर थे और व दूसरे में आठ बंदर थे उनको नगर पालिका के पीछे भवन के अंदर कई दिनों से पटक रखा था ना तो उनके लिए पीने के लिए पानी था ना खाने के लिए भोजन की व्यवस्था थी जिसके चलते इस कड़ाके की गर्मी में भूख और प्यास से तड़प कर तीन से चार बंदरों की मौत हो गई और पिंजरे कड़ी धूप में गर्म होने की वजह से लोहे के तारों से बंदर जख्मी हो चुके थे वही सूचना मिलने पर विनोद राजोरिया बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुचे इस दौरान आम जनता भी मौके पर पहुंचकर बंदरों को पानी चने और केले खिलाए उसके बाद एसडीएम साहब, नगर पालिका ईओ, तहसीलदार, थाना इंचार्ज आदि को सूचना दी इसके बाद भी प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा उसके बाद ठेकेदार का एक आदमी गाड़ी लेकर आया और पिंजरे को गाड़ी के अंदर रख कर बोला की छाया में खड़ी करता हूं और गाड़ी को स्पीड में भगा कर ले गया इसके बाद थाने पर जाकर सूचना दी और एसडीम साहब को फोन किया एसडीएम कार्यालय के आगे होकर गाड़ी ले जा रहा था तो एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों ने गाड़ी को रुकाने की कोशिश की पर स्पीड से भगा ले गया इस तरह से बंदरो जो यातना दी जा रही है वह निंदनीय है ऐसे में नगर पालिका अधिकारीयो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की हैं

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