प्रदेश में जहां कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते तीन मई तक जन अनुशासन पखवाड़े के तहत कर्फ्यू लगाया गया है। वहीं इसके चलते एक बार फिर पुलिसकर्मियों के कंधे पर बड़ी और गहरी जिम्मेदारी आ गई है। सरकार के द्वारा बनाये गए नियमो का कड़ाई से पालन हो ये सुनिश्चित करना भी पुलिस और प्रशासन की ज़िम्मेदारी है। इसी के चलते आम आदमी से लेकर सरकार के मंत्री संतरियों को भी मजबूरन नियमो का पालन पड़ रहा है। उदहारण के तौर पर भारतीय ट्राइबल पार्टी यानि की BTP MLA राजकुमार रौत के विवाह के कार्यक्रम में कोरोना गाईडलाईन की धज्जिया उड़ाते हुए 50 से अधिक लोग सम्मिलित हुए तो प्रशसन ने कड़ा रुख अपनाया। कलेक्टर के निर्देश पर मौके पर पंहुचे एसडीएम ओर पुलिस अधिकारियों ने विधायक के ससुर पर 25 हजार जुर्माना लगाते हुए कोविड गाइड लाइन की पालना के लिए पाबंद किया। इस घटना पर राजकुमार रौत का कहना है कि उन्होंने कोविड नियमों के पालना करते हुए ही शादी में लोग बुलाये थे, लेकिन उनके विधायक होने के नाते शादी देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई।जहा एक तरफ कोरोना गाइडलाइन्स का हवाला देते हुए MLA राजकुमार रौत पर सख्त रुख अपनाया गया तो वही कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के वालिद हिस्ट्रीशीटर गाज़ी मोहम्मद के इन्तेकाल पर 20 से अधिक लोगो के इक्कठा होने पर किसी के भी द्वारा कार्रवाई नहीं की गयी। आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई क्या गाजी मोहब्बत के पुत्र प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री है इसलिए कोई कार्यवाही नहीं हुई अगर इसलिए कोई कार्यवाही नहीं हुई तो सरकार का मंत्री ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रदेश की गहलोत सरकार और प्रशासन कोरोना गाइडलाइन की पालना सख्ती से नहीं कर रहे हैं जो अपना होता है उसको शीतलता प्रदान की जाती है और जो विरोधी या विपक्ष का होता है उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो रही है। कार्यवाही तो खुद गहलोत के कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद पर भी होनी चाहिए क्योंकि उनके पिता के अंतिम संस्कार में 20 से अधिक लोग मौजूद थे जबकि सरकार की गाइड लाइन में सिर्फ 20 लोगों को ही अंतिम संस्कार में उपस्थित होने की अनुमति है। लेकिन सरकार मौन है।ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि बीटीपी विधायक राजकुमार रोत पर कार्रवाई क्या इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने पिछले दिनों गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। सवाल तो बहुत खड़े होते हैं लेकिन जवाब कौन दें पूछती है प्रदेश की जनता।