पुजारी शंभू शर्मा के शव का अंतिम संस्कार नौ दिन बाद भी नहीं हो सका है। दौसा में पांच दिनों के बाद पिछले चार दिनों से जयपुर में सिविल लाइंस फाटक पर शव रखकर धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच दो तीन बार पुलिस से टकराव की नौबत भी आ चुकी है। भारी संख्या में पुलिस बल और उच्चाधिकारी धरनास्थल पर मौजूद हैं। नेता और उनके समर्थक भी टेंट लगाकर डेरा जमाए हुए हैं। पुजारी शंभू के मौत के बाद एक सप्ताह से भी ज्यादा दिनों तक चले आंदोलन के बाद आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत चल रही है। सचिवालय में आज सुबह 10 बजे आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत शुरू हो गई है। बुलावा आने के बाद रविवार को राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा की अगुवाई में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सचिवालय पहुंचा। माना जा रहा है कि आज बैठक में कोई न कोई नतीजा निकल सकता है। आसार ये भी है की सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर सहमति दे सकती है। सूत्रों की माने तो पुजारी शंभू के मौत के बाद शुरू हुए आंदोलन से कहीं न कहीं सरकार को उपचुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके लिए सरकार किसी भी तरह इस मामले को शांत करना चाहती है। यही वजह है कि सरकार ने दूसरी बार पहल कर आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया है। इससे पहले राजस्व मंत्री हरीश चौधरी के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही है। हालाँकि सरकार ने बातचीत के लिए मुख्य सचेतक महेश जोशी को अधिकृत किया गया है। इस बैठक में मुख्य सचेतक डॉ जोशी, मुख्य सचिव निरंजन आर्य, डीजीपी एम.एल लाठर, पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव, जयपुर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मौजूद हैं, जबकि आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी मीणा, सांसद रामचरण बोहरा, विधायक अशोक लाहोटी, पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी, सुमन शर्मा और विप्र फाउंडेशन अध्यक्ष राजेश कर्नल हैं और सरकार से वार्ता कर रहे हैं। इसके अलावा आज जब सचिवालय में किरोड़ीलाल मीणा और सरकार के बीच बातचीत हो रही थी, उसी वक्त भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने अपने सैंकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ सरदार पटेल मार्ग से धरनास्थल तक पैदल मार्च निकाला। इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जयपुर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के आंकड़ों के बीच धरनास्थल पर लगातार कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ रही है। लेकिन कानून भी बेबस नजर आ रहा है। हालाँकि राजनीतिक प्रेक्षकों की माने तो भाजपा पुजारी शंभू के मौत के मामले को उपचुनाव में भुनाने की तैयारी में है, साथ ही इस आंदोलन के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जा रही है। और इसी के साथ आपको बता दे की जिन प्रमुख मांगों पर गतिरोध बरकरार है वो इस प्रकार है।

  • पुजारी की भूमि पर हुई रजिस्ट्री को रद्द किया जाए
  • भूमाफियाओं को गिरफ्तार कर भूमि पर बने निर्माण को हटाया जाए
  • प्रदेश भर की मंदिर माफ़ी की ज़मीन पर भूमाफियाओं के कब्ज़े ना हों इसके लिए सशक्त कानून बनाया जाए……… बहराल सभी इस बात के इंतज़ार में हैं कि कब ये गतिरोध टूटे और पुजारी के शव का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार हो।