देश को आजाद हुए 72 साल हो गए हैं लेकिन आज भी लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है ऐसे में अपना जीवन यापन करने के लिए पानी की एक बूंद बूंद के लिए किस तरह से तरसना पड़ता है जिसे पीने तक के पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है तब जाकर अपनी प्यास बजाते है।दरअसल हम बात कर रहे हैं पश्चिमी राजस्थान के जालोर जिले की जो पिछड़ा हुआ जिला माना जाता है वही जिले में सबसे पिछड़े क्षेत्र नेहड़ को सबसे ज्यादा तवज्जो की जरूरत थी लेकिन उससे भी ज्यादा उपेक्षा मिली। सीमांत क्षेत्र में दरअसल गुजरात से आने वाली नर्मदा नहर 20 से 30 किमी नजदीक से गुजर रही है लेकिन इसका पानी नेहड़ को नसीब नहीं हो पाया है। ऐसे में नर्मदा का मीठा पानी जिले के अंतिम छोर आहोर उपखंड क्षेत्र तक 160 किमी दूर पहुंचाया जा चुका है और जिले के 500 गांव इससे प्यास बुझा रहे हैं। 2008 के दौरान नर्मदा का पानी जिले में आया था। वही विभिन्न पेयजल प्रोजेक्ट और नहर के किनारे बूस्टर लगाकर जिले में पानी की सप्लाई शुरू हुई। ऐसे में नर्मदा से जुड़े तीन प्रोजेक्ट बन चुके हैं। दो प्रोजेक्ट से जिले के बाकी हिस्सों में पानी पहुंचाया जा रहा है। नेहड़ क्षेत्र को नहर आने के 13 साल बाद अब तीसरे ईआर प्रोजेक्ट से उम्मीद है जो मुख्य रूप से भीनमाल क्षेत्र के लिए तैयार किया जा रहा है।नेहड़वासी कच्ची बेरियों से प्यास बुझा रहे जबकि 2008 में आई नर्मदा के ये 3 प्रोजेक्ट बन चुके ग्राफिक्स के जरिए।

पहला: डीआर प्रोजेक्ट: यह सांचौर उपखंड क्षेत्र के पहाड़पुरा में बना था। जो सांचौर समेत 160 गांव जुडऩे थे लेकिन नर्मदा के पानी से अब तक 127 गांव व सांचौर शहर को जोड़ा जा चुका है। वही अभी 33 गांवों को जोडऩा बाकी है इसको लेकर काम चल रहा।

दूसरा:एफआर प्रोजेक्ट: यह प्रोजेक्ट चितलवाना उपखंड क्षेत्र के रणोदर-तैतरोल सरहद में बनाया गया। इस प्रोजेक्ट से जालोर शहर समेत 299 गांव जोडऩे थे। लेकिन अब तक 294 गांवों को जोड़ा जा चुका है।

तीसरा: ईआर प्रोजेक्ट: सांचौर उपखंड क्षेत्र के पालड़ी सरहद में निर्माण शुरू हुआ। 2016 तक पूर्ण होना था। मुख्य प्रोजेक्ट भीनमाल के लिए है। इसके लिए 348 करोड़ मुख्य निर्माण व 24 करोड़ दस साल की देखरेख को लेकर बजट था। लेकिन एक कंपनी ने लंबे समय तक काम नहीं किया अब दूसरी कंपनी को दिया है।

IMG 20210615 122518

वही एक्सईन के.एल.कांत का कहना है की एक माह में डीपीआर बनने की उम्मीद है जो नेहड़ समेत नर्मदा के बचे सभी गांवों को ईआर क्लस्टर प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा। इसको लेकर डीपीआर तैयार हो रही है। मुख्य ईआर प्रोजेक्ट से क्लस्टर प्रोजेक्ट में पानी देकर सभी गांवों को जोड़ा जाएगा ।लेकिन इंतजार करना होगा अब तक ईआर प्रोजेक्ट का भी 50% काम ही हुआ है प्रशासन दावा कर रहा है कि इस प्रोजेक्ट से जल्द जोड़ देंगे। लेकिन हकीकत यह हैं कि इस प्रोजेक्ट से जुडऩे में कम से कम 5 वर्ष लग जाएंगे। क्योंकि ईआर क्लस्टर प्रोजेक्ट को मुख्य ईआर प्रोजेक्ट से पानी दिया जाएगा जबकि अब तक ईआर प्रोजेक्ट का भी 50 प्रतिशत कार्य नहीं हो पाया हैं। यह पूर्ण होने में भी कई वर्ष लगेंगे। ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कब तक नेहड़ के पानी से प्यासे लोगों को पानी कब तक नसीब होता ।

IMG 20210615 122525