अमेरिकी अधिकारियों को मिले इस दस्तावेज के मुताबिक चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस की मदद से जैविक हथियार तैयार करने पर काम कर रहे थे। तो क्या कोरोना वायरस जिसने तबाही और बर्बादी की तस्वीरें दुनिया को दिखाई, वो दरअसल वायरस नहीं बल्कि दुनिया पर अब तक का सबसे बड़ा हमला था। एक ऐसा हमला जिसकी साजिश भारत के पड़ोसी मुल्क ने रची और इस हमले की आड़ में खुद को बना लिया इकॉनमी किंग। कम से कम अमेरिका के ताज़ा दावे के मुताबिक तो ये बाते सही लग रही है। असल में अमेरिका ने दावा किया है कि उसे कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे ये खुलासा होता है कि कोरोना के पीछे चीन की बड़ी साजिश हो सकती हैअमेरिकी अधिकारियों को मिले इस दस्तावेज के मुताबिक चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस की मदद से जैविक हथियार तैयार करने पर काम कर रहे थे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय को मिले ये दस्तावेज 6 साल पुराने होने का दावा किया जा रहा है। दस्तावेज के मुताबिक तीसरे विश्व युद्ध में जीत के लिए जैविक हथियार तैयार किए जा रहे थे। इन दस्तावेजों में इन हथियारों के इस्तेमाल का समय भी बताया गया है। साथ ही ‘दुश्मन के मेडिकल सिस्टम’ पर असर की चर्चा भी की गई है। दि ऑस्ट्रेलियन अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य के डोजियर में हथियार बनाने के लिए बीमारियों के इस्तेमाल की बात भी कही गई है। अब अगर अमेरिका के इस दावे को सही माना जाए तो ज़ाहिर तौर पर ये खतरा बड़ा है, और कोरोना की आड़ में चीन एक बेहद खतरनाक हथियार तैयार कर दुनिया को दहलाने की साजिश रच रहा है।बता दें, कोरोना की शुरुआत के साथ ही ये चर्चा भी तेज़ हो गई थी की ये कोई वायरस नहीं है, बल्कि जैविक हथियार है, जिस पर चीन काम कर रहा था। अमेरिका और ब्राजील जैसे देश साफतौर पर कह रहे हैं कि चीन ने कोरोना वायरस को बायोलॉजिकल हथियार के तौर पर तैयार किया है, कई देशों ने तो इस मामले में चीन की जांच करने की मांग भी की है।लेकिन अब जो रिपोर्ट सामने आई है कि उसके मुताबिक, चीन 2015 से ही SARS कोरोना वायरस को सैन्य क्षमता के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा था… कई अधिकारी तो अब भी ये मानते हैं कि वायरस चीनी लैब से ही निकला है, इसमें बताया गया है कि तीसरा विश्व युद्ध बायोलॉजिकल हथियारों पर ही लड़ा जाएगा।