गोविंददेवजी मंदिर में होगा गोपूजन, गोशालाओं में होंगे विशेष आयोजन

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कार्तिक शुक्ल अष्टमी रविवार को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। गौ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों के अलावा गोशालाओं में बड़े स्तर पर गोपाष्टमी के आयोजन होंगे। गोविंददेवजी मंदिर में गोपाष्टमी उत्सव 22 नवंबर को मनाया जाएगा। सुबह मंगला आरती के बाद ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक होगा। श्रृंगार झांकी के बाद सुबह सवा दस बजे मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में गौमाता का पंचामृत अभिषेक कर पूजा की जाएगी। इस अवसर पर ठाकुर जी नटवर पोशाक धारण किए रहेंगे। विशेष अलंकार और फूलों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
मंदिर के प्रबंधक मानस गोस्वामी ने बताया कि कोविड-19 के कारण मंदिर के पट 31 नवंबर तक दर्शनार्थियों के लिए बंद है। इसलिए श्रद्धालु ऑनलाइन दर्शन करें।

गोसेवा से दूर होंगे ग्रहदोष:
आचार्य महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि गौ माता की सेवा करने से नवग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है। बृहस्पति का दोष हो तो बृहस्पतिवार के दिन गाय को गुड़ और चने की दाल खिलानी चाहिए। बुध का दोष हो तो गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। सूर्य का दोष हो तो गेहूं, मंगल का दोष हो तो मसूर की दाल या गुड़ खिलाना चाहिए। शुक्र का दोष हो तो गाय की विशेष सेवा करनी चाहिए। शनि का दोष हो तो काली गाय या सांड को रोटी खिलानी चाहिए। राहु-केतु का दोष होने पर गाय की सेवा करनी चाहिए। चंद्र का दोष हो तो विशेष सेवा करनी चाहिए और उसे चावल खिलाना चाहिए।

गाय भारतीय संस्कृति का प्राण:
पं. नीलेश शास्त्री ने बताया कि गाय भारतीय संस्कृति का प्राण है। गाय संसार का सबसे पवित्र पशु है। इसलिए इसे देवतुल्य माना जाता है। गाय के शरीर में सभी देवताओं का निवास माना जाता है। गाय के गोबर और गौमूत्र से भूमि पवित्र होती है। भगवान श्रीकृष्ण का गोविंद नाम इसीलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने गोपालन-गोसंरक्षण और संवर्धन के लिए सभी लोगों को प्रेरित किया था।