कोविड19 महामारी के चलते बालघाट कस्बे में मोहर्रम पर नहीं निकाले गए ताज़िये, लोगों को पिलाया गया छबील

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। मोहर्रम कार्य समिति के अध्यक्ष छोटे पठान ने बताया कोविड-19 के चलते सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन के अनुसार इस बार कस्बे में ताजिए वह जुलूस नहीं निकाले गये। इस मौके पर कस्बे में विभिन्न जगह छबील बनाकर दूरदराज से आए लोगों को पिलाया गया। इस मौके पर आसिफ खान, शाहिद पठान, जावेद पठान, कासिम खान, सलाम खान आदि समाज के लोग उपस्थित रहे।

इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम मुहर्रम है। मुसलमानों के लिए ये सबसे पवित्र महीना होता है। इस महीने से इस्लाम का नया साल शुरू हो जाता है। मोहर्रम माह के 10वें दिन यानी 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा कहा जाता है। इन दिन को इस्लामिक कैलेंडर में बेहद अहम माना गया है। क्योंकि इसी दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी। इसलिए इस माह को गम के महीने के तौर पर मनाया जाता है। इमाम हुसैन की शहादत की याद में ही ताजिया और जुलूस निकाले जाते हैं। ताजिया निकालने की परंपरा सिर्फ शिया मुस्लिमों में ही देखी जाती हैं। इस बार कोरोना महामारी के मद्देनजर मोहर्रम के तमाम आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।