कोरोना की भेंट चढ़ा कोटा का प्रसिद्ध दशहरा मेला

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कोटा का दशहरा मेला इस बार कोरोना की भेंट चढ़ा हैं। हर साल जहां नवरात्रा स्थापना के साथ ही दशहरे मेले में चहल-पहल शुरू हो जाती थीं। वहीं इस बार सन्नाटा पसरा रहेगा नगर निगम प्रशासन केवल इसकी औपचारिकता के लिए आशापुरा माताजी मंदिर में सुबह पूजन करेगा। उसके बाद रावण दहन की प्रक्रिया दशमी को पूरी की जाएगी। इसमें 11 फीट के रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।

कोटा का दशहरा मेला केवल राजस्थान में नहीं पूरे देश में प्रसिद्ध है। जहां पर करीब 25 दिन तक आयोजन होते हैं। इसमें नवरात्रा स्थापना के साथ ही रामलीला व राम कथा का शुभारंभ होता है। इस दौरान दशमी को दरी खाना और रावण दहन का कार्यक्रम शुरू होता है। उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा यहां पर बिखरी जाती है। क्योंकि इस बार कोरोना का असर पूरे विश्व में छाया हुआ है। इसकी छाया कोटा के दशहरा मेला पर भी पड़ी है। क्योंकि 100 साल से अधिक समय से दशहरे मेले का आयोजन हो रहा है। इसलिए इसकी केवल औपचारिकता की जाएगी ताकि चल रही परंपरा नहीं टूटे।

6 करोड़ का होता है बजट
नगर निगम हर साल दशहरे मेले के आयोजन के लिए करीब 6 करोड रुपए का बजट आरक्षित करता है। इसमें रामलीला राम कथा के आयोजन के साथ ही अन्य खर्चे भी शामिल किए जाते हैं। होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, सिने संध्या, कव्वाली, भजन संध्या आदि महत्वपूर्ण होती है। जिसे देखने और सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। इस बार दशहरे मेले आयोजनों के नहीं होने से मेला आयोजन स्थल में सन्नाटा पसरा हुआ है।

केवल परंपरा का होगा निर्वहन

क्योंकि कोटा का दशहरा मेला 100 साल से अधिक समय से आयोजित हो रहा है। इसलिए इस परंपरा को बनाए रखने के लिए नगर निगम प्रशासन औपचारिकता पूरी करेगा। इसी क्रम में शनिवार को सुबह आशापुरा माता मंदिर में पूजन किया जाएगा। इसी पूजन के साथ ही दशहरे मेले का शुभारंभ हुआ करता था। इसके अलावा 25 अक्टूबर को रावण दहन की प्रक्रिया 11 फुट के पुतलों को जलाकर की जाएगी। पूर्व में यहां पर आतिशबाजी का आयोजन भी रखा जाना था। लेकिन कोरोना के कारण भीड़ की संभावना से इस आयोजन को निरस्त कर दिया गया है। माना जा रहा है कि पूरा दशहरे मेले में मुश्किल से ₹5 लाख का भी खर्च नहीं होगा। इस प्रकार इस मेले के आयोजन नहीं होने से निगम को करीब 6 करोड रुपए की बचत होगी।