करोड़ों रुपए के गौरक्षा सरचार्ज को कोरोना से बचाव में काम लेगी सरकार

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। प्रदेश में कोरोना महामारी से बचाव के लिए गोरक्षा सरचार्ज के करोड़ों रुपए को काम में लिया जाएगा। गहलोत सरकार की और से यह विधेयक पास किया गया है। इसके बाद भाजपा और कई गोरक्षा दल गहलोत सरकार पर हमलावर हो गए है।

राजस्थान गाय कल्याण समिति के प्रमुख दिनेश गिरि ने कहा कि यह गायों के साथ विश्वासघात है। ऐसे विधेयक की वजह से गायों को भूखा रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार गायों के पक्ष में लिए गए नीतिगत फैसलों को खत्म करना चाहती है। दिनेश गिरी ने चेतावनी दी कि गहलोत सरकार गो विरोधी कानून वापस ले। अन्यथा, 21 सितंबर को प्रदेशभर में गहलोत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

वहीं, भाजपा के पूर्व गो मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हमारी सरकार ने गो मंत्रालय की स्थापना की थी। मंत्रालय को गौशालाओं का समर्थन देने के लिए अनुदान देने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों ने गायों में आस्था होने की वजह से अधिभार दिया है। अगर अन्य कारणों में इसे काम में लिया जाएगा तो यह गलत है।

समझे: क्या है गोरक्षा अधिभार और कैसे हुआ पारित ?

इस साल 14 मई को राज्य सरकार ने राजस्थान स्टांप अधिनियम, 1998 में संशोधन के लिए राजस्थान स्टांप (संशोधन) अध्यादेश, 2020 पेश किया। जहां अधिनियम की धारा 3-बी में लिखा था, ‘गाय के संरक्षण और प्रसार और उसकी संतान के लिए अधिभार’। अध्यादेश में आगे यह जोड़ दिया गया, ‘और प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं को कम करने के लिए’। इसका मतलब यह था कि अधिभार का उपयोग अब सूखा, बाढ़, महामारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के साथ-साथ गाय के कल्याण के लिए किया जा सकता है।

इसी तरह बीते 21 अगस्त को कांग्रेस सरकार ने राजस्थान स्टांप (संशोधन) विधेयक, 2020 पेश किया। जिसमें तर्क दिया गया है कि भोजन, आश्रय, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में कोरोना महामारी से पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए और भविष्य को ध्यान में रखते हुए अधिभार के उपयोग का दायरा व्यापक किया जाना चाहिए। विधेयक को 24 अगस्त को विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।

भाजपा राज में गोरक्षा के लिए शराब बिक्री पर लगा था 20 फीसदी सेस

गायों के कल्याण के लिए पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा 2016 में अधिभार पेश किया गया था। राजे के अंतिम कार्यकाल के दौरान राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य बन गया था। जिसके पास गो-कल्याण के लिए एक समर्पित मंत्रालय था। इसके पहले मंत्री ओटाराम देवासी थे। 2018 में राजे सरकार ने गायों की सुरक्षा के लिए शराब बिक्री पर 20 फीसदी सेस भी लगाया था। बता दे, राज्य को वर्ष 2018-19 में गो रक्षा के लिए स्टांप शुल्क पर 266.13 करोड़ रुपए और वर्ष 2019-20 में 291.98 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। गो- रक्षा के लिए शराब की बिक्री पर उपकर से राजस्व 2018-19 में 270.12 करोड़ रुपए और 2019-20 में 424.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए।