आरपीएससी 2018 एलडीसी परीक्षा में ओबीसी जनरल वर्ग को भुगतनी पड़ी ये सजा…

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। आज तक आपने सुना और देखा होगा कि किसी भर्ती में जब दस्तावेजों के सत्यापन हो जाते है तो उसकी नौकरी पक्की मानते है। लेकिन हाल ही में आरपीएसी 2018 की एलडीसी परीक्षा में ऐसी धांधली नजर आई। जिसकी वजह से सामान्य और ओबीसी वर्ग के कई अभ्यार्थियों के सपने ही चकनाचूर हो गए।

बता दें कि आरपीएससी 2018 एलडीसी परीक्षा में दस्तावेज सत्यापन के समय अधीनस्थ विभाग में ओबीसी की 2093 और जनरल की 5303 सीटें थी। लेकिन जब परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित किया गया था, तो 587 सीटें बिना किसी सूचना के कम कर दी गई। जिसमें ओबीसी वर्ग की 1866 और सामान्य वर्ग की 4943 सीटें रह गई। एलडीसी भर्ती परीक्षा में ओबीसी का आरक्षण 21 प्रतिशत से काट कर 17 प्रतिशत और सामान्य वर्ग का आरक्षण 50 प्रतिशत की जगह 46 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि आरक्षण की ये कटौती सामान्य और ओबीसी वर्ग को ही उठानी पड़ी। जबकि अन्य तीन वर्गों एससी, एसटी और एमबीसी को आरक्षण में पूरा लाभ दिया गया।

बता दें कि आरपीएससी की व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक और रीट भर्ती के साथ ही एलडीसी 2013 भर्ती में आरक्षण पूरी तरह से नियमानुसार लागू किया थे। लेकिन एलडीसी 2018 भर्ती में आरक्षण बिल्कुल ही गलत तरीके से दिया गया है। साथ ही इस बारें में प्रमुख शासन सचिव रोली सिंह और प्रशासनिक सुधार विभाग के वेंकटेश्वर,अरुण प्रकाश तथा बोर्ड में मुकुट बिहारी को लिखित शिकायत दी है। लेकिन अधिकारी इस आरक्षण घोटाले पर कोई भी एक्शन लेते हुए नजर नहीं आ रहे है।

साथ ही करीब दो साल से 587 अभ्यर्थी उम्मीद लगाए बैठे थे। उनकी उम्मीद को अचानक अंतिम समय में इस तरह से तोड़ना गैर वाजिब है। ऐसे में दस्तावेज सत्यापन के बाद पदों में इस प्रकार कटौती अनुचित है और युवाओं के भविष्य के साथ ​बहुत बड़ा खिलवाड़ है।