राजधानी में आधी रात को डॉ सौम्या गुर्जर का निलंबन होना राजनीति में एक नया मोड़ लाता कि उससे पहले ही भाजपा के दिग्गजों को दो पालों में देखने के बाद उलझने और ज्यादा उलझ गई। आपको बता दें कि राज्य में जब से कांग्रेस ने सरकार बनाई तभी से शुरू हुई राजनीतिक दलों में उठा पटक अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस दल में सीएम पद के लिए चली कई महीनों की लड़ाई ने कई दिग्गजों के राजनैतिक कैरियर पर सवाल खडा कर दिए तो दुसरी ओर कई नेताओं की खाली थाली में मलाई अचानक आ गिरी। कांग्रेस दल में अभी उठा पटक खत्म भी नहीं हुई थी कि भाजपा खेमे में भी अविश्वास के बादल हर नेता के मन में हिचकोले खाते नजर आने लग रहे हैं।बात करें भाजपा संगठन की तो हाल ही में वसुंधरा राजे खेमे को पदों से रिक्त करने की चर्चा ने जोर पकड़ा ही था कि डॉ सौम्या गुर्जर के निलंबन ने सब को हैरत में डाल दिया। दरअसल पूनिया एंड कंपनी ने हाल ही में पार्टी के पदाधिकारियों की नई सूची जारी की, जिसमें लगभग कई ऐसे नाम नरारद मिले जो वसुंधरा समर्थक थे। ऐसे में गहलोत सरकार द्वारा भाजपा संगठन पर वसुंधरा समर्थक शिल धाभाई को महापौर पद पर थोपना नई राजनीति को जन्म दे सकता है। वहीं आपको बता दें कि इससे भी बड़ी हैरानी तब हुई जब एक ओर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा अपनी टीम के साथ सौम्या गुर्जर के निलंबन को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पुतला फूंक रहे थे, तो दुसरी ओर राजधानी में भाजपा पार्षद शिल धाभाई कार्यवाहक के रूप में महापौर का पदभार संभाल रही थी। अचानक सामने आई दोनों तस्वीरें भाजपा दल में एक बड़े उफ़ान का संकेत तो दे ही रही है, साथ ही राजधानी की राजनीति में भी बड़े उलटफेर की आशंकाओं को जन्म दे रही है। आज हर किसी के मन में डॉ सौम्या गुर्जर को लेकर तरह-तरह के सवालों ने डेरा डाले हुए हैं। राजनैतिक पद पर हुई ऐसी कार्रवाई वाकई में चौंकाने वाली है, चूंकि बात करे राजनीति के अतित की तो हमेशा नुकसान ब्यूरोक्रेसी या पुलिस प्रशासन ने ही उठाया है, पहली बार शायद ऐसा हुआ है जंहा राजनीति के इतने बड़े पद को इतनी आसानी से नुकसान पहुंचा गया हो, तो वहीं धाभाई का पदभार संभाल लेना और दुसरी ओर पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा विरोध करना किसी राजनीतिक आंधी के निमंत्रण को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि धाभाई किसके इशारे पर कार्य करने का फैसला लेगी, क्योंकि भाजपा में रहते हुए भी आखिर धाभाई को महापौर तो कांग्रेस ने बनाया है। तो दुसरी ओर आयरन लेडी ख्यातिप्राप्त डॉ सौम्या गुर्जर भी अपने अपमान को सहन नहीं करेगी। राजनीति के इस टकराव में एक बड़ा तूफान जन्म जरूर लेगा।