अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा राजस्थान प्रदेश के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष उमेश राज सिंह शेखावत राजा साहब ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा जिसमें बताया कि -राजस्थान एक विशेष ऐतिहासिक विरासत प्रधान अनोखा प्रदेष है। जहाँ पर वीर राजपूत योद्धाओं के षौर्य ओर बलिदान की गौरवषाली गाथाओं के साथ तलवार, कटार, भाला आदि षस्त्र नवरात्रा-दषहरा के त्यौहारों पर घर घर में केवल परम्परागत पूजा पाठ के अभिन्न अंग के प्रतीकात्मक शक्ति-पूजन के प्रयोग में लाये जाते है। हमारे 25 वर्ष के लम्बे सामाजिक सरोकार-अनुभव के आधार पर हम दावे से कह सकते हैं कि राजपूत समाज की मौजूदा दयनीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में तलवार, कटार, भाला आदि की लाईसेन्स फीस और फिर प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराना उनके लिए मुष्किल ही नहीं असंभव होगा। परिणाम-स्वरूप इसका हमारी सांस्कृतिक विरासत एवं परम्परागत षौर्योन्मुख चिन्तनधरा पर घातक असर होगा। हमारी तलवार को प्रत्यक्ष दैव-षरीर के प्रतीक मानने की आस्था है, अगर बेटा सेना में सीमा पर युद्धरत होने से मजबूरी में शादी में नहीं आये तो उसकी जगह तलवार के साथ वधू के फेरे करने की सनातन प्रथा है। उक्त प्रावधान को नये कानून में जोड़ते वक्त यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिये कि भारतीय परम्परा से विवाहोत्सव में धार्मिक एवं सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार, प्रत्येक समाज के दूल्हे के हाथ में घोड़ी पर एवं फेरों में तलवार, कटार का होना अनिवार्य होता है। आज भी प्रायः तलवार षौर्य और सम्मान के रूप में नेताओं को भेंट की जाती है। इसके परिणाम स्वरूप एक तरफ जहाँ आमजन को बाध्य होकर सदियों से चली आई परम्परागत रीति रिवाज को छोड़ने पर बाध्य होना पड़ेगा। क्योंकि यह आयुध नियम-2006 बहुत जटिल और प्रति वर्ष बढ़ी हुई नवीनीकरण फीस के अलावा, इसमें तलवार, संगीन, कटार, भाला आदि को शामिल किये जाने से अव्यवहारिक है। इसके लागू होते ही आम जन विषेषतः गांव, देहांत में रहने वाले अनपढ़/अनभिज्ञ लोग जिनके पास परम्परागत तलवार, कटार होगी। वो इस कानून के दायरे में आकर अनायास ही अपराधी की श्रेणी मे आ जायेंगे और बेवजह पुलिस उन्हें परेषान करने के लिए अधिकृत होगी। सरकार के सामने अवैध हथियार को रोकने की बहुत बड़ी समस्या है। लेकिन यह भी निर्विवाद सत्य है कि अधिकांषतः अवैध हथियार अपराधी तत्वों, भू-माफियों, श राब-माफियों एवं काले धन्धों में लिप्त लोगों के साथ पाये जाते है। जिन पर सरकार को प्रतिबद्धता और इच्छा षक्ति के साथ अविलम्ब सख्त से सख्त कार्रवाई करने की आवष्यकता है। आपसे निवेदन है कि प्रस्तावित आयुध नियम 2016 को तर्कसंगत और न्यायसंगत बनाने के लिये इसे राजस्थान में संषोधित किया जाये और धार्मिक सामाजिक एवं ऐतिहासिक प्रयोजन की वस्तुएं जैसे तलवार, भाला, कटार और अन्य ऐतिहासिक एवं विरासती धारदार षस्त्रों को लाईसेंस मुक्त किया जाए और विरासत के हथियारों का संपत्ति की तरह हस्तान्तरित करने के प्रावधान किये जाए और अनुज्ञापत्र देने के प्रावधानों से मुक्त किया जावें।