डेस्क न्यूज़: अपने खड़ूस अंदाज़ में खेलने वाली, दूसरी टीम को उकसाने वाली, आंखों में आंखे डालकर खेलने वाली, गुस्सैल टीम Australia को आप इसे पसंद करें या नापसंद लेकिन कभी नज़रंदाज़ नहीं कर सकते। ख़ासकर उस वक्त जब यह टीम अपने इतिहास के सबसे खराब दौर में से एक से गुजर रही हो। Australia ने टी20 विश्व कप 2021 के फाइनल में New Zealand को 8-विकेट से हराकर पहली बार पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब जीता है। New Zealand ने 20 ओवरों में 172/4 का स्कोर बनाकर किसी टी20 विश्व कप फाइनल का सर्वाधिक टोटल बनाया था। अपना दूसरा टी20 विश्व कप फाइनल खेल रहे ऑस्ट्रेलिया ने 18.5 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया।

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इस T20 वर्ल्ड कप ने भी यही बात पक्की की है। महत्वपूर्ण मैचों में टॉस के रूप में ऑस्ट्रेलिया के पाले में किस्मत भले ही गिर गई हो, लेकिन टीम ने जबरदस्त जोश और काफी आत्मविश्वास के कारण यह खिताब जीता है। कैसे? आइए जानने की कोशिश करते हैं…

Australia को लगातार पांच T20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था

टूर्नामेंट से पहले Australia को लगातार पांच T20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था। ये हार एक या दो टीमों से नहीं। बल्कि Australia जिसके साथ भी खेलने उतरी, उसे सबसे ज्यादा हार मिली। इंग्लैंड ने हराया। भारत ने हराया। न्यूजीलैंड ने और वेस्टइंडीज ने भी हराया। हद तो तब हो गई जब बांग्लादेश ने भी उसे मात दे दी। इन नतीजों के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 14 साल से जिस सपने का सपना देख रही थी उसे पूरा करने के लिए यूएई पहुंची। 6 बार फेल। ख़िताब तो छोड़िए इस बार टीम का सेमीफाइनल में पहुंचना बेहद मुश्किल माना जा रहा था।

Australia ने वॉर्नर पर भरोसा किया और उन्हें वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया

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David Warner इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े स्टार बनकर उभरे। हालांकि 5 फीट 5 इंच लंबा यह खिलाड़ी बल्लेबाजों की दुनिया में गगनचुंबी इमारत है, लेकिन लंबे समय तक फॉर्म में नहीं था। वार्नर की तबीयत इतनी खराब थी कि उनकी आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले उन्हें कप्तानी से हटाया और फिर उन्हें प्लेइंग-11 से भी बाहर कर दिया। हैदराबाद में कुछ मैचों के दौरान उनके स्टेडियम में आने पर रोक लगाने की भी खबरें आई थीं।
इसके बावजूद Australia ने वॉर्नर पर भरोसा किया और उन्हें वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया। अब वॉर्नर ने अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि क्रिकेट में फॉर्म अस्थायी होता है और क्लास स्थायी होती है।

मिचेल मार्श के रूप मिल गया मिडिल ओवर का पावर हिटर ऑलराउंडर

ऑस्ट्रेलिया को इस वर्ल्ड कप में एक ऐसा ऑलराउंडर मिला, जो आने वाले समय में वर्ल्ड क्रिकेट में वैसा ही तहलका मचा सकता है, जैसा इंग्लैंड के लिए बेन स्टोक्स ने किया था। उस ऑलराउंडर का नाम मिशेल मार्श है। वे लंबे समय से खेल रहे हैं लेकिन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। आखिरकार उन्होंने इस टूर्नामेंट में अपना जलवा दिखाया। ऑस्ट्रेलिया के पास वास्तव में बीच के ओवर में अपनी फॉर्म में एक पावर हिटर है। उनकी बल्लेबाजी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया की टीम पावर प्ले और डेथ ओवर के बीच के दौर में भी लय बरकरार रखने में सफल रही। ऐसे में टूर्नामेंट की ज्यादातर टीमों ने संघर्ष किया।

हर खिलाड़ी निकला सुपरहीरो

वार्नर और मार्श के अलावा ऑस्ट्रेलिया की ओऱ से और भी कई सुपर हीरो निकले। सच तो यह है कि इस टीम का हर खिलाड़ी अपने आप में सुपरहीरो साबित हो रहा है। जिसका दिन होता है वही मैच निकाल देता है।

अगला टी-20 वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया में होगा। यह टीम घरेलू कंडीशंस में एक बार फिर खिताब की मजबूत दावेदार होगी।

एक पहलू और याद रखिए। ऑस्ट्रेलिया को पहला वनडे वर्ल्ड कप जीतने में चार टूर्नामेंट और 12 साल लगे थे। लेकिन, जब इसने जीत का स्वाद चखा तो पांच वर्ल्ड कप अकेले ले उड़ा। अब टी-20 में भी शुरुआत हो गई है। भले 14 साल लगे हों। दूसरी टीमों को सावधान हो जाना चाहिए।

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