Jaipur: दो दशक बाद अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी हुई तो सिर्फ ड़र और दहशत का माहौल देखने को मिला। चारों तरफ बंदूके लहराते तालिबानी, चीख-पुकार, वतन छोड़कर भागते अफगानी, सरेआम तालिबानी फ़रमान सुनाते तालिबान के लड़ाके और जिसने तालिबानी फरमानों को नहीं माना उस पर बरसाई गई अंधाधुंध गोलियां। सरेआम लोगों को सुनाई गई सजा। चारों तरफ मौत का खौफनाक मंज़र। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान की तस्वीर बदल चुकी है। अब लोग बस ड़र और खौफ के साए में जी रहे है। किसी देश की स्थति को परख़ने और समझने के लिए सौ दिन बेहद कम है लेकिन अफगानिस्तान के लिए पिछले सौ दिन बेहद खास़ और दिलचस्प रहे है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी देश छोड़कर भाग निकले, अब अफगानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार है। हालात बिल्कुल बदल चुके है। अब महिलाओं को घर से बाहर निकलकर काम करने की इजाज़त नही, न लड़कियों को पढ़ने और पढ़ाने की मंजूरी है। दुनियाभर की सरकारों और संयुक्त राष्ट्र ने अब तक अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। आलम ये है कि तालिबान अपनी कूटनीतिक और जनसंचार की गतिविधियां बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर अपनी सरकार को मान्यता दिलवाने का भरसक प्रयास कर रहा है। तालिबान दुनिया से गुहार लगा रहा है कि वह उनकी सरकार और शासन को मान्यता दें और अफ़गानिस्तान की वित्तीय मदद करें। अफ़ग़ानिस्तान में हालात बेहद गंभीर है। भुखमरी और अकाल का ख़तरा पैदा होने की आशंका है। जिसको लेकर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के 2 करोड़ से अधिक लोगों को भूख से बचाने के लिए वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को अनाज की आपूर्ति बढ़ानी होगी। दिक्कतें कई है। लाखों की संख्या में अफगानी देश छोड़कर जा चुके है। तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से ही अब इस्लामिक स्टेट को सीधे तौर पर अपना दुश्मन बना लिया है। इस्लामिक स्टेट से सुरक्षा के मोर्चे पर लगातार चुनौती मिल रही है। लेकिन सबसे ज्यादा चिंता पेट की सता रही है। बदलता मौसम, तेज़ी से नीचे आता तापमान, कई क्षेत्र सूखे की चपेट में आ गए है। जिससे अब अफगानियों को भूख का ड़र ज्यादा सता रहा है।