Jaipur: मरूधरा की सियासत में हर दिन कोई न कोई शिगूफा छोड़ दिया जाता है। कभी तीर चलाया तो कहीं और जाता है लेकिन निशाना कहीं और साधा जाता है। हुकूमत के लिए सारे जतन करने के बाद भी हाथ खाली रहे तो सहज ही निराशा का अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही हो रहा है सूबे की सबसे पुरानी पार्टी के देवनारायण के वंशज के साथ जो हुकूमत के लिए लड़े तो खूब लेकिन जादूगर के सामने टिक नहीं पाए। अब रंगीले राजस्थान की महक से दूर होने की चिंता जो हर रोज सालती जा रही है। पहले दस जनपथ तक विन्नती की ऐन केन प्रकारेण सम्मान जो रह जाए मगर अब सूबे की हाथ वाली सरकार को जादूगर एकतरफा चला रहे है जिसके कारण देवनारायण के वंशज अब कुछ समझ नहीं पा रहे है। अब पड़ौसी सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जल्द है जिसके मद्देनजर जादूगर का प्रयास है कि देवनारायण के वंशज को इन चुनावों के बहाने मरूधरा की सियासत से हमेशा के लिए दूर कर दें ताकि उनकी राह में कभी कोई कांटा नहीं बन सके। इसी अज्ञात भय के चलते देवनारायण के वंशज को रात में भी जादूगर के कारनामे दिखते है। अब देवनारायण का वंशज गुदगुदाने भी लग गया है और गाने के बोल भी बड़े अजीब है। गाना गुदगुदाते हुए कह रहे है कि अब यहीं जीना, यही मरना और कहीं नहीं जाना मगर इनको कौन समझाए कि सियासत में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती है। पूर्व में डिप्टी सीएम और हाथ वाली पार्टी में मरूधरा की कमान संभालने वाले देवनारायण के वंशज को पता नहीं था कि उन्हे यह दिन भी देखने पड़ेंगे। लेकिन इनके सिपहसालार इनको वास्तविकता बताने में बड़ी चूक कर बैठे जिसके कारण ही आज वह बेबस होकर रह गए है। सियासी जानकारों की माने तो मरूधरा की सियासत में जादूगर से पंगा लेना टेढ़ी खीर है। अभी तक के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो सामने आया है कि जिसने भी मरूधरा की सियासत के चाणक्य और जादूगर के नाम से विख्यात मारवाड़ के गांधी से पंगा लिया वह ठंडे बस्ते में चला गया। ठंडे बस्ते में जाने वाले सियासी आकाओं की भी लंबी फेहरिस्त है जो कभी इस सूबे में अपना दबदबा रखते थे मगर सियासत में जादूगर से टक्कर लेना उनके लिए काफी महंगा पड़ गया। देवनारायण के वंशज को अब जाकर समझ में आया है कि समुद्र में रहकर किस से बैर नहीं करना चाहिए। इतिहास गवाह है कि जब भी कोई मरता है तो कंधे तो श्मसान तक ही दिए जाते है उसके बाद राख तो उसी की होती है जिसकी मौत हुई है।