मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं के सैलाब से एक बार फिर से किसान आंदोलन ने तेजी पकड़ ली है। बता दें कि गणतंत्र दिवस की हिंसा के बाद आंदोलन में जो ढिलाई आई थी, वो बीते गुरूवार गाजीपुर सीमा पर मचे संग्राम के बाद दूर हुई है। राकेश टिकैत के आंसुओं के सैलाब से किसानों में जोश आया है। बोरिया बिस्तर बांधने वाले किसान अब एक बार फिर से बॉर्डर पर डेरा जमाने लगे है। साथ ही यूपी और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों से किसान गाजीपुर बॉर्डर पर जुटने लगे हैं।

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साथ ही किसान नेता राकेश टिकैत ने एक बार फिर से हुंकार भरी है कि हम अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे और प्रदर्शन स्थल खाली नहीं करेंगे। टिकैत ने कहा कि मंच नहीं छोडूंगा चाहे इसके लिए मुझे गोली खानी पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा, किसानों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्हें मारने की साजिश हो रही है। अगर सरकार ने कानून वापस नहीं लिए तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। मैं इस देश के किसानों को बर्बाद नहीं होने दूंगा। साथ ही राकेश टिकैत ने कहा कि हम पहले अपने मुद्दों पर भारत सरकार से बात करेंगे, लोगों से शांतिपूर्ण रहने का आग्रह करता हूं। बहरहाल इसी बीच जानते है कौन है आखिर किसान नेता राकेश टिकैत…

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जानकारी के अनुसार बता दें कि राकेश सिंह टिकैत का जन्म यूपी के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ था। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की है। उसके बाद एलएलबी किया। किसान नेता टिकैत की शादी 1985 में सुनीता देवी से हुई। साथ ही शादी की साल ही राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे, लेकिन बाद में प्रमोशन होकर सब इंस्पेक्टर बन गए थे। किसान नेता टिकैत के एक बेटा व दो पुत्री है। इसी बीच बता दें कि राकेश टिकैत के पिता महेन्द्र टिकैत के नेतृत्व में 90 के दशक किसान आंदोलन चल रहा था और उस आंदोल के चलते ही उन्हें अपनी पुलिस नौकरी छोडऩी पड़ी और पूरी तरह से भारतीय किसान यूनियन के साथ किसानों की लड़ाई में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। पिता महेंद्र सिंह टिकैत की कैंसर से मृत्यु के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह भारतीय किसान यूनियन की कमान संभाल ली।

साथ ही सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार बता दें कि किसान नेता बनने के बाद वो करीब 40 से ज्यादा बार जेल जा चुके है। एक बार तो भूमि अधिग्रण कानून के खिलाफ उन्हें लगभग 35 दिनों से अधिक दिन के जेल में रहना पड़ा था। बहरहाल इसी बीच बता दें कि हाल ही में गणतंत्र दिवस के दिन किसान परेड के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें 37 किसान नेताओं के नाम हैं। साथ ही धरने में शामिल लगभग सभी नेताओं के नाम इसमें शामिल हैं.