जयपुर|Mahima Jain:एसएमएस में किडनी, लीवर, हार्ट के बाद अब लंग्स ट्रांसप्लांट भी हो सकेगा। एसएमएस देश का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां लंग्स ट्रांसप्लांट होगा। इसका लाइसेंस मिलने के बाद लंग्स और हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए डॉक्टरों की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। इधर, निजी अस्पताल सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल को भी लंग्स ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिला है। देश के निजी अस्पतालों में लंग्स ट्रांसप्लांट का खर्च 30 से 50 लाख रु. आ रहा है। एसएमएस में यह 15 से 20 लाख रु. होगा।

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लाइसेंस की प्रक्रिया

ट्रांसप्लांट की अनुमति लेने के लिए राज्य सरकार को आवेदन करना होता है। केन्द्र सरकार के नेशनल आर्गन ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) की गाइडलाइन के अनुसार इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर और उपकरण को परखने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। इसके बाद डॉक्टरों और स्टाफ की ट्रेनिंग होती है। डॉ. अंजुम, डॉ. इंदु, डॉ. रीमा और डॉ. केके महावर प्रशिक्षण ले चुके हैं। डॉ. ध्रुव शर्मा चेन्नई में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

अंगदान से दिया जीवनदान

ऑर्गन ट्रांसप्लांट के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि प्रदेश में अब तक 42 दधीचि बन चुके हैं। ये वे ब्रेनडेड मरीज हैं, जिनके परिजनों की सहमति के बाद अंगदान कर लोगों को जीवनदान मिला। पहला ऑर्गन ट्रांसप्लांट 2015 में हुआ है।

देशभर में 1500 से 2 हजार मरीजों को डोनर का इंतजार

एसएमएस के कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि राजस्थान समेत देशभर में 1500 से 2 हजार मरीजों को लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए डोनर का इंतजार है। मौजूदा स्थिति में सरकारी स्तर पर लंग्स ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं होती। साथ ही सबसे जटिल सर्जरी होने के कारण कोई हिम्मत भी नहीं जुटाता। इसलिए रजिस्ट्रेशन भी नहीं होते।

हर साल 80 हजार लिवर, 50 हजार हार्ट की जरूरत

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सड़क हादसों में हर साल 2 लाख मौतें होती हैं। नोटो के अनुसार हर साल 20 हजार किडनी, 80 हजार लिवर, 50 हजार दिल, एक लाख कॉर्निया की जरूरत पड़ती है। प्रदेश में सबसे ज्यादा वेटिंग किडनी में है।